उर्दू सीखने की तमन्ना है तुम्हें, अभी सीन में RULG के सिवा कुछ भी नहीं
अविनाश मिश्र
अगस्त 3, 2021
तेरहवीं सदी के हिंदुस्तान में जन्मी उर्दू ने तब से अब तक हमारे कहने को कितना सहज, सुंदर और संप्रेषणीय किया है; इसका नज़ारा करना हो तो हिंदी कवि शमशेर बहादुर सिंह की इन पंक्तियों से गुज़रिए :
वो अपनों की बातें, वो अपनों की ख़ू—बू
हमारी ही हिंदी, हमारी ही उर्दू!
ये कोयल्-ओ-बुलबुल के मीठे तराने :
हमारे सिवा इनका रस कौन जाने!
उर्दू समय के साथ-साथ हिन्दवी, ज़बान-ए-हिंद, गुजरी, दक्कनी, ज़बान-ए-दिल्ली, ज़बान-ए-उर्दू-ए-मुअल्ला, हिंदुस्तानी और रेख़्ता जैसे नामों से भी जानी-पहचानी गई। व्याकरण और ध्वनि में हिंदी से बहुत निकटता रखने वाली उर्दू का शब्द-संसार अरबी, फ़ारसी, तुर्की, ब्रज और संस्कृत से समृद्ध हुआ है। पंद्रहवीं सदी में इसमें और भी नई सूरतों का इज़ाफ़ा हुआ। और इस सदी में ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ ने अपनी स्थापना के साथ उर्दू की गरिमा को पुनर्स्थापित किया। ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ की कोशिशों को भरपूर स्वागत, सहयोग और स्नेह मिला है। आज उर्दू और ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ की उपलब्धियों को बताने के लिए ‘रेख़्ता’ का नाम ही काफ़ी है। इसमें समय-समय पर नए-नए आयाम और उपक्रम जुड़ते रहे हैं, जिन्हें विस्तार से जानने-समझने के लिए rekhta.org की तरफ़ रुख़ किया जा सकता है।
इस सिलसिले में ही ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ की नई पहल है—‘रेख़्ता उर्दू लर्निंग गाइड’ यानी RULG
यह हिंदी माध्यम से उर्दू पढ़ने-लिखने के लिए एक आवश्यक और प्रभावी पुस्तक है। यह पुस्तक बहुत सिलसिलेवार ढंग से उर्दू लिपि सीखने की प्रक्रिया को सरल और सुखद बनाती है। इस संदर्भ में उर्दू लिपि की प्रमुख विशेषताएँ और उर्दू सीखते समय ध्यान देने योग्य बातें बताते हुए इस पुस्तक में दिए गए निर्देश और उदाहरण, उर्दू संख्याएँ, विशेष अंक, संक्षिप्तियाँ, विशेष प्रतीक, विराम-चिह्न, चुनिंदा उर्दू गद्य और शाइरी के नमूने उर्दू सीखने के पूरे सफ़र को एक रोचक अनुभव प्रदान करते हैं। यह सफ़र उर्दू साहित्य को मूल भाषा में पढ़ने की राह खोलता है।
आज उर्दू भाषा की रचनाशीलता लोकप्रियता के नए मक़ाम छू रही है। इंटरनेट की सहज उपलब्धता ने इस उपलब्धि को संभव किया है। लेकिन अब भी ज़्यादातर उर्दू-अदब के मुरीद इस व्यापक रचनाशीलता से गुज़रने के लिए रोमन या देवनागरी लिपि पर निर्भर हैं। ‘रेख़्ता उर्दू लर्निंग गाइड’ इस निर्भरता को सीमित या समाप्त करने की दिशा में ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ की एक अग्रणी पहल है।
किसी भी भाषा को उसकी मूल लिपि में पढ़ना सबसे प्रामाणिक और प्रिय अनुभव होता है। किसी भाषा की अस्ल रंगतें और ध्वनियाँ, उसे उसके मूल स्वरूप में पढ़-लिखकर ही हम पर पूरी तरह खुलती हैं। भाषा की जान भाषा के मुहावरे को बताया गया है। ये मुहावरे मूल भाषा के जानकार ही पकड़ पाते हैं। इसलिए कहना न होगा कि उर्दू-प्रेमियों के लिए ‘रेख़्ता उर्दू लर्निंग गाइड’ एक अनमोल तोहफ़े की तरह है।
इस पुस्तक के लेखक प्रोफ़ेसर अब्दुर्रशीद, सह-लेखिका सुमैरा नवाज़ और अनुवादक ख़ुर्शीद आलम ने आते-आते आने वाली उर्दू ज़बाँ को जल्द आ जाने लायक़ बनाने के लिए क़ाबिल-ए-ज़िक्र परिश्रम किया है।
रेख़्ता फ़ाउंडेशन के संस्थापक संजीव सराफ़ इस पुस्तक की प्रस्तावना में कहते हैं :
‘‘इस किताब की तैयारी के मरहले में शामिल रहने की वजह से मैं इस बात को पूरे यक़ीन से कह सकता हूँ कि लेखकों ने इसे उपयोगी बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया है। साथ ही इस किताब से कई ऐसी विशेषताएँ जुड़ी हैं जो इसे इस क़िस्म की अन्य किताबों से विशिष्ट बनाती हैं। ख़ास तौर से प्रत्येक मॉड्यूल के अंत में उपयोगी नोट्स, शब्दावली और अभ्यास शामिल हैं। इसके अलावा पाठक किताब के उस हिस्से से भी लाभान्वित होंगे जिसमें शब्दों का प्रासंगिक उपयोग सिखाया गया है। इस किताब की एक अनूठी विशेषता रेख़्ता की लिप्यंतरण कुंजी तालिका है, जो लंबे समय से एक अनछुआ शैक्षिक अभ्यास रही है।
यह सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किया जाता है कि नई भाषा सीखने के लिए लिखने और पढ़ने दोनों सतह पर नियमित रूप से अभ्यास करने की ज़रूरत होती है। इसलिए मैं पाठकों को सलाह दूँगा कि वे इसका पालन करें। किताब को मॉड्यूल के साथ दिए गए निर्देशों को ध्यान में रखकर पढ़ने से ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाया जा सकता है।’’
और अंत में आप यहाँ तक आए हैं, इसका अर्थ है कि आप उर्दू और उसके अदब में दिलचस्पी रखते हैं, और उर्दू और उसके अदब में दिलचस्पी रखने वाला भला ऐसा कौन होगा जिसे जौन एलिया में दिलचस्पी और उनसे मुहब्बत न हो, तो जौन एलिया की ही एक नज़्म की इन दो पंक्तियों :
मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें
मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं
को कुछ बदलकर बस यही कहना है :
उर्दू सीखने की तमन्ना है तुम्हें
अभी सीन में RULG के सिवा कुछ भी नहीं
~•~
‘रेख़्ता उर्दू लर्निंग गाइड’ इस लिंक पर जाकर ऑर्डर कर सकते हैं : RULG
अतिथि रचनाकार
- अंकिता शाम्भवी
- अखिलेश सिंह
- अंचित
- अतुल तिवारी
- अनिरुद्ध उमट
- अनुभव
- अनुराग अनंत
- अपूर्वा सिंह
- अमन त्रिपाठी
- अली जावेद
- अविनाश
- अविनाश मिश्र
- अस्मुरारी नंदन मिश्र
- आदर्श भूषण
- आदित्य शुक्ल
- आयशा आरफ़ीन
- आलोक रंजन
- आशीष मिश्र
- इरशाद ख़ान सिकंदर
- उदय शंकर
- उपासना
- ऋषभ प्रतिपक्ष
- कुमार मंगलम
- कृष्ण कल्पित
- गौरव गुप्ता
- चन्दन पाण्डेय
- तोषी
- त्रिभुवन
- दया शंकर शरण
- दयाशंकर शुक्ल सागर
- दिनेश श्रीनेत
- देवी प्रसाद मिश्र
- देवीलाल गोदारा
- देवेश
- देवेश पथ सारिया
- नवीन रांगियाल
- निशांत
- निशांत कौशिक
- नीलाक्षी सिंह
- पंकज चतुर्वेदी
- पंकज बोस
- पीयूष राज
- प्रणव मिश्र तेजस
- प्रत्यूष पुष्कर
- प्रदीप्त प्रीत
- प्रभात
- प्रभात कुमार
- प्रभात प्रणीत
- प्रांजल धर
- प्रियंका दुबे
- प्रियदर्शन
- प्रियंवद
- मनमीत सोनी
- मनीषा जोषी
- मनोज कुमार पांडेय
- ममता कालिया
- मृगतृष्णा
- मृत्यंजय
- मोनिका कुमार
- मोहन कुमार डहेरिया
- योगेंद्र आहूजा
- रमाशंकर सिंह
- राकेश कुमार मिश्र
- राजेंद्र देथा
- राजेश जोशी
- रुकैया
- वर्तिका
- विजय शर्मा
- विपिन कुमार शर्मा
- वियोगिनी ठाकुर
- व्योमेश शुक्ल
- शचीन्द्र आर्य
- शम्पा शाह
- शायक आलोक
- शिवेन्द्र
- शुभम् आमेटा
- संजय चतुर्वेदी
- संजय शेफर्ड
- सतीश छिम्पा
- सावजराज
- सिद्धेश्वर सिंह
- सुदीप सोहनी
- सुदीप्ति
- सुधीर सुमन
- सुमेर सिंह राठौड़
- सोनू यशराज
- सौरभ अनंत
- सौरभ पांडेय
- हरि कार्की
- हरी चरन प्रकाश
- हिन्दवी